Kaal Bhairav Jayanti 2025: तिथि, पूजा विधि, महत्व और कथा की पूरी जानकारी

काल भैरव कौन हैं?

भगवान शिव का सबसे उग्र और शक्तिशाली रूप “काल भैरव” के नाम से जाना जाता है। “काल” का अर्थ होता है समय और “भैरव” का मतलब है भय को दूर करने वाला। भगवान काल भैरव को काशी (वाराणसी) का रक्षक देवता माना गया है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, उसके जीवन से भय, बाधाएँ और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती हैं।

काल भैरव जयंती 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

हर वर्ष मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव ने अपने काल भैरव स्वरूप में अवतार लिया था।

  • तिथि प्रारंभ: 13 दिसंबर 2025 (शनिवार) सुबह 07:45 बजे
  • तिथि समाप्त: 14 दिसंबर 2025 (रविवार) सुबह 06:30 बजे
  • मुख्य पर्व: 13 दिसंबर 2025, शनिवार

इस दिन भगवान भैरव की विशेष पूजा का विधान है।

काल भैरव जयंती की पूजा विधि

  1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के बाद काल भैरव जी की आराधना करें।
  3. काले तिल, काली उड़द, सरसों का तेल, नारियल, लाल या नीले फूल अर्पित करें।
  4. “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
  5. कुत्तों को भोजन कराना इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि वे भगवान काल भैरव का वाहन हैं।
  6. रात्रि में भैरव चालीसा और भैरव स्तोत्र का पाठ विशेष फल देता है।

काल भैरव जयंती का महत्व

  • काल भैरव की पूजा से भय, रोग और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।
  • यह दिन साधना और आत्म-अनुशासन के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
  • व्यापार, करियर और सामाजिक जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए काल भैरव जयंती अत्यंत शुभ मानी जाती है।
  • काशी के काल भैरव मंदिर में इस दिन विशेष पूजा और दर्शन का आयोजन होता है।
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काल भैरव अवतार की कथा

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। इस विवाद को समाप्त करने के लिए भगवान शिव ने एक अग्नि स्तंभ का रूप धारण किया, जिसका कोई आरंभ और अंत नहीं था।
ब्रह्मा जी ने अहंकारवश झूठ कहा कि उन्होंने उस अग्नि स्तंभ का शिखर देख लिया। इस झूठ से शिव जी क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने भृकुटि से काल भैरव का सृजन किया। काल भैरव ने ब्रह्मा जी का एक सिर काट दिया, जिससे उनका अहंकार समाप्त हो गया।
तब से भगवान शिव का यह स्वरूप “काल भैरव” के नाम से पूजनीय हुआ।

काल भैरव जयंती पर किए जाने वाले विशेष उपाय

  • शत्रु और भय से मुक्ति के लिए “ॐ ह्रीं कालभैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें।
  • रात्रि में सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • गरीब और जरूरतमंद लोगों को कंबल या भोजन का दान करें।
  • घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए भैरव कवच या भैरव स्तोत्र का पाठ करें।

निष्कर्ष

काल भैरव जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें समय के महत्व, अनुशासन और भयमुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देता है। जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

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